हाल ही में ईरानी कार्यकर्ता नर्गेस मोहम्मदी को रॉयल स्वीडिश अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार 2023 के लिए चुना गया है। उन्हें यह पुरस्कार ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने की उनकी लड़ाई के लिए प्रदान किया गया है। बता दें कि नरगेस मोहम्मदी एक मानवाधिकार वकील और एक स्वतंत्रता सेनानी हैं। यह फिलहाल जेल में बंद हैं। दरअसल, ईरानी शासन ने उन्हें 13 बार गिरफ्तार किया, 5 बार दोषी ठहराया और कुल 31 साल जेल और 154 कोड़े की सजा सुनाई। रॉयल स्वीडिश अकादमी के अनुसार इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार उन लाखों लोगों को भी सम्मानित करता है। जिन्होंने महिलाओं को निशाना बनाने वाली भेदभाव और उत्पीड़न की धार्मिक शासन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया है। आए जानते है नोबेल शांति पुरस्कार के संबंध में :
यह पुरस्कार नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा दिया जाता है। अन्य नोबेल पुरस्कारों की अपेक्षा यह नॉर्वे के ओस्लो में प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार का पदक नॉर्वेजियन मूर्तिकार गुस्ताव विजलैंड द्वारा डिज़ाइन किया गया था। जिसमें अल्फ्रेड नोबेल को अन्य पदकों से थोड़ा अलग मुद्रा में दर्शाया गया है। 1901 में इसके पहले विजेता जीन हेनरी दुनांट थे। 2022 का यह पुरस्कार संयुक्त रूप से तीन विजेताओं एलेस बियालियात्स्की, मेमोरियल और सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज़ को दिया गया था। इसके अलावा मलाला यूसुफजई को सबसे कम 17 साल की उम्र में 2014 में, एवं जोसेफ रोटब्लैट को 87 वर्ष की आयु में 1995 में सर्वाधिक उम्र में यह पुरस्कार प्रदान किया गया है। बता दें कि अब तक 19 बार ऐसा हुआ है जब यह पुरस्कार प्रदान नहीं किये गए हैं। अब तक कुल 18 महिलाओं को इससे सम्मानित किया जा चुका है। जिनमें बर्था वॉन सटनर 1905 में इसकी पहली महिला प्राप्तकर्ता बनीं। भारत से अब तक इस पुरस्कार के प्राप्तकर्ता मदर टेरेसा(1979) और कैलाश सत्यार्थी(2014) रहे हैं।
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