केंद्र सरकार संभवत 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने की तैयारी कर रही हैं। अंतरिम बजट एक अस्थाई वित्तीय योजना है। जो सरकार द्वारा आम चुनाव से पहले अपने अंतिम वर्ष में प्रस्तुत की जाती है। अनुच्छेद 116 के अनुसार, यह सरकार को भारत की संचित निधि से अस्थाई धन आवंटित करने के लिए संसदीय स्वीकृति लेने की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य तब तक के लिए वित्तीय निरंतरता सुनिश्चित करना है जब जब तक कि नई सरकार चुनाव के बाद पूर्ण केंद्रीय बजट पेश ना कर दे।
अंतरिम बजट सरकार के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में पेश किया जाता है। यह संवैधानिक मानदंडों के अनुरूप है। जिससे वित्तीय उत्तरदायित्व के सुचारू परिवर्तन की अनुमति मिलती है। यह चुनाव के बाद नई सरकार के कार्यभार संभालने तक राजकोषीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य को पूर्ण करता है।
नियमित केंद्रीय बजट के विपरीत अंतरिम बजट एक अल्पकालिक योजना है। जो मूलतः तीन से चार महीने के लिए होती है। यह मतदाताओं को प्रभावित करने से रोकने के लिए बड़े नीतिगत बदलाव या योजनाएं शुरू करने से परहेज करता है। मतदाता को प्रभावित करने से बचने का यह अनुपालन निर्वाचन आयोग की आचार संहिता के अनुरूप है।
अंतरिम बजट अल्पकालिक व्यय, राजस्व और राजकोषीय घाटे के अनुमानों की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। यह सरकार को प्राथमिकताओं का संकेत देते हुए अगले पाच वर्षों के लिए अपना आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की अनुमति देता है। हालांकि प्रमुख कर संबंधी प्रस्ताव पेश नहीं किए जा सकते, लेकिन मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए लोक लुभावने उपायों से संबंधित परिवर्तन करने के लिए लचीलापन दिया जा सकता है। अंतरिम बजट में प्रमुख नीतिगत घोषणाओं से बचा जाता है। जो आने वाली सरकार पर वित्तीय बोझ डाल सकती है। यह मतदाताओं को प्रभावित करने वाली महत्त्वपूर्ण योजनाओं को छोड़कर चुनाव आयोग की आचार संहिता का पालन करता है। संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए, आर्थिक सर्वेक्षण की प्रस्तुति अंतरिम बजट का हिस्सा नहीं है। हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी हो सकते हैं।
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