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सोमवार, 29 जनवरी 2024

Bharat Ratna: भारत रत्न

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यह भारतीय गणराज्य का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा के लिए दिया जाता है। इसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा दिए गए एक प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी। प्रारंभ में यह पुरस्कार कला, साहित्य, विज्ञान और लोक सेवाओं तक ही सीमित था। लेकिन वर्ष 2011 में इसका विस्तार हुआ और इसमें मानव प्रयास के अन्य क्षेत्र को शामिल किया गया। कलाकार नंदलाल बोस द्वारा रचित इस पुरस्कार में देवनागरी लिपि में लिखित शिलालेखों के साथ पीपल के पत्ते के आकार का एक पदक शामिल है।

भारत रत्न के लिए मानदंड

इसे जाति व्यवसाय परिस्थिति या लैंगिक भेदभाव के बिना उच्च श्रेणी की असाधारण सेवा या प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। इसे किसी भी राष्ट्रीयता के व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। जिन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान, लोक सेवा, शांति या मानव कल्याण में उत्कृष्ट योगदान दिया है। इसे मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है। इसमें आपराधिक कृतियों या नैतिक रूप से अधम कृत्यों के दोषी व्यक्तियों को शामिल नहीं किया गया है।

पुरस्कार के लिए प्रक्रिया

यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जाती है, जो कैबिनेट की स्वीकृति के बाद राष्ट्रपति की सिफारिश करता है। उक्त नामांकन विभिन्न स्रोतों जैसे राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों, सांसदों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों से आते हैं। पुरस्कार प्रदान करने का अंतिम अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है। जिसकी घोषणा आमतौर पर गणतंत्र दिवस या अन्य विशेष अवसरों पर की जाती है। राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक समारोह में प्रदान किए गए पुरस्कार में एक सनद यानी प्रमाण पत्र और एक पदक शामिल है। हालांकि इसमें कोई मौद्रिक अनुदान का प्रावधान नहीं है।

भारत रत्न के प्राप्तकर्ता

वर्ष 1954 से अब तक 49 व्यक्तियों को जिसमें 15 मरणोपरांत भी शामिल है, भारत रत्न प्राप्त हुआ है। वर्ष 1954 में पहले प्राप्तकर्ता सी राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधा कृष्णन और सीवी रमन थे। जबकि हाल के प्राप्त कर्ताओं में वर्ष 2019 में नानाजी देशमुख, भूपेन हजारिका और प्रणव मुखर्जी शामिल हैं। वहीं आगामी प्राप्तकर्ता मनु उपरांत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री करपुरी ठाकुर हैं। अब तक चार विदेशी नागरिकों और दो गैर मानवों भारतीय राष्ट्रीय सेना और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को भी इस पदक से सम्मानित किया जा चुका है।

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