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जाने; लक्ष्मण जी कि पत्नी वनवास में उनके साथ क्यों नहीं गई

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लक्षमण जैसा भाई और लक्षमण जैसा पुत्र होना कितना मुश्किल है और आज के इस कलयुग में अगर आपको लक्षमण जैसा भाई मिल जाए या लक्ष्मण जैसा पुत्र मिल जाए तो आप समझिए आप धन्य हो गए। रामायण के अनुसार वनवास सिर्फ भगवान श्री राम को मिला था। लेकिन लक्ष्मण अपने बड़े भाई श्री राम से इतना प्रेम करते थे। कि उन्होंने सिर्फ भगवान राम के लिए अपने जीवन के 14 वर्ष वन में बिता दिए और एक क्षण के लिए भी उन्होंने महल और राजपाठ के सुखों के बारे में नहीं सोचा। राजमहल एक क्षण में छोड़ दिया। राजपाठ सुख जो था सब छोड़ दिया। अगर लक्ष्मण भगवान राम के साथ वनवास पर ना जाते, तो उनसे कोई प्रश्न नहीं किया जाता, कोई उनसे यह नहीं कहता कि वह क्यों नहीं गए क्योंकि उन्हें वनवास हुआ ही नहीं था। लेकिन लक्ष्मण के रोम रोम में भगवान श्री राम के लिए ऐसा समर्पण था। कि उन्हें अपने भाई से एक ण का भी वियोग बर्दाश्त नहीं था। रामायण में इस बात का वर्णन मिलता है कि जब लक्ष्मण को भगवान राम के वनवास पर जाने की सूचना मिली, तो उन्होंने माता कौशल्या के समक्ष यह सौगंध खाई, कि अगर उन्हें भगवान श्री राम के साथ वनवास पर जाने से रोका गया तो वह अपने प्राणों को अयोध्या में ही त्याग देंगे। उन्होंने माता कौशल्या से कहा कि भगवान राम मेरे प्राण है और भला प्राणों के बिना कोई कैसे जीवित रह सकता है। इसलिए लक्ष्मण का महल वही होगा, जहां भगवान राम वास करेंगे। लक्ष्मण के समर्पण से भगवान राम परिचित थे। लेकिन वह यह भी जानते थे कि वनवास कष्टों से भरा होगा और वह कभी नहीं चाहते थे कि लक्ष्मण को उनकी वजह से इन कष्टों के साथ रहना पड़े। इसलिए भगवान राम ने यह निश्चय किया कि वह लक्ष्मण के बिना ही वनवास पर जाएंगे। लेकिन जब लक्ष्मण के नेत्र दुख से लाल हो गए, होठ सूख गए, जीभ अकड़ गई और उन्होंने अपने सुध बुध खो दिए, तब भगवान राम को लक्ष्मण की इस अवस्था को देखकर विवश होना पड़ा और कहना पड़ा कि व धन्य हैं कि उन्हें लक्ष्मण जैसा भाई मिला और इसी के बाद लक्ष्मण भगवान राम और सीता जी के साथ 14 वर्षों के वनवास में सदैव उनके साथ रहे।
आजकल के जमाने में जब माता-पिता की संपत्ति के लिए भाई भाई से द्वेष रखता है। तब लक्ष्मण ने अपने बड़े भाई भगवान श्री राम के लिए सभी भौतिक सुख त्याग दिए थे और वनवास के दौरान उन्होंने भगवान राम की सच्चे मन से पूरी सेवा की थी। बड़ी बात यह है कि लक्ष्मण जैसा भाई होना तो मुश्किल है ही, लेकिन लक्ष्मण जैसा पुत्र होना भी बहुत मुश्किल काम है। राम कथा के अनुसार जब लक्ष्मण को वनवास पर जाना था तब भगवान राम की तरह वह भी विवाहित थे और उनकी पत्नी का नाम था उर्मिला, जिस तरह सीता जी ने भगवान राम के साथ वनवास पर जाने के लिए उनसे आग्रह किया। उसी तरह उर्मिला ने भी लक्ष्मण के साथ वनवास पर जाने के लिए आग्रह किया और कहा कि वह भी साथ जाएंगी। लेकिन लक्ष्मण ने उर्मिला से कहा कि वह वनवास के दौरान अपना पूरा समय भगवान राम और सीता जी की सेवा में लगाएंगे। इसलिए उनकी पत्नी उर्मिला को भी अयोध्या में रहकर उनके राज परिवार की सेवा करनी चाहिए और उनकी अयोध्या में रहते हुए ही प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने एक तरीके से उर्मिला से ये कह दिया कि वनवास के दौरान मेरे पास आपके लिए कोई समय नहीं होगा। सोचिए लक्ष्मण एक साथ कितने सारे धर्मों का पालन कर रहे थे और इसलिए कहा जाता है कि, लक्ष्मण जैसा भाई और लक्ष्मण जैसा पुत्र, सौभाग्यशाली लोगों को ही मिलता है।

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