स्कॉटलैंड के आइल ऑफ स्काई पर हाल ही में एक नए उड़ने वाले डायनासोर के जीवाश्म के खोज की घोषणा की गई है। इस नई खोजी गई प्रजाति को ‘सियोप्टेरा इवांसे’ कहा गया है। खोजे गए अवशेषों में एक ही विशिष्ट डायनासोर का आंशिक कंकाल शामिल है। इसमें कंधे, पंख, पैर और रीढ की हड्डी के हिस्से शामिल थे। यह डायनासोर पेट्रो सोर के डार्विन पटेरा समूह से संबंधित है। माना जा रहा है कि यह शुरुआती जौरासी काल से नवीनतम जौरासी काल तक 25 मिलियन से अधिक वर्षों तक जीवित रहा होगा। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के अनुसार मध्य जुरासिक काल के टेरोस जीवाश्म की दुर्लभता और उनकी अपूर्णता से वैज्ञानिक क्लैड के विकास को बेहतर ढंग से नहीं समझ पा रहे थे। वहीं ब्रिटेन के मध्य जुरासिक में इसकी उपस्थिति पूरी तरह से आश्चर्य चकित करने वाली थी। क्योंकि इसके अधिकांश करीबी रिश्तेदार चीन से हैं।
स्कॉटलैंड के आइल ऑफ स्काई पर हाल ही में एक नए उड़ने वाले डायनासोर के जीवाश्म के खोज की घोषणा की गई है। इस नई खोजी गई प्रजाति को ‘सियोप्टेरा इवांसे’ कहा गया है। खोजे गए अवशेषों में एक ही विशिष्ट डायनासोर का आंशिक कंकाल शामिल है। इसमें कंधे, पंख, पैर और रीढ की हड्डी के हिस्से शामिल थे। यह डायनासोर पेट्रो सोर के डार्विन पटेरा समूह से संबंधित है। माना जा रहा है कि यह शुरुआती जौरासी काल से नवीनतम जौरासी काल तक 25 मिलियन से अधिक वर्षों तक जीवित रहा होगा। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के अनुसार मध्य जुरासिक काल के टेरोस जीवाश्म की दुर्लभता और उनकी अपूर्णता से वैज्ञानिक क्लैड के विकास को बेहतर ढंग से नहीं समझ पा रहे थे। वहीं ब्रिटेन के मध्य जुरासिक में इसकी उपस्थिति पूरी तरह से आश्चर्य चकित करने वाली थी। क्योंकि इसके अधिकांश करीबी रिश्तेदार चीन से हैं।
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