Minimum Support Price: न्यूनतम समर्थन मूल्य - MSD News

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

Minimum Support Price: न्यूनतम समर्थन मूल्य

Minimum Support Price

न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी के कानूनी आश्वासन की मांग को ले पंजाब हरियाणा एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसानों द्वारा हरियाणा दिल्ली बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।

एमएसपी क्या है

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी किसानों को मूल्य स्थिरता और आय सुरक्षा प्रदान करने हेतु भारत सरकार द्वारा नियोजित एक प्रणाली है। यह कृषि वस्तुओं के लिए न्यूनतम मूल्य के रूप में कार्य करता है। जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को उनकी उपज के लिए न्यूनतम लाभकारी मूल्य प्राप्त हो। सरकार समय-समय पर इनपुट लागत मांग आपूर्ति की गतिशीलता और मुद्रा स्मिति के दबाव जैसे कारकों के आधार पर एमएसपी को संशोधित करती रहती है।

एमएसपी गणना की क्रियाविधि

एमएसपी गणना में उत्पादन चक्र के दौरान किसानों द्वारा किए गए विभिन्न लागत घटकों पर जटिल विचार शामिल है। कृषि लागत और आयोग यानी सीएसीपी उत्पादन लागत के व्यापक आकलन के आधार पर एमएसपी की सिफारिश करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तीन मुख्य लागत सूत्रों का उपयोग किया जाता है।

    1. e2 यानी वास्तविक भुगतान लागत
    2. a2+flfl यानी वास्तविक भुगतान लागत और पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य
    3. c2 यानी स्वामित्व वाली भूमि और पूंजी पर लागू किराए एवं ब्याज समेत व्यापक लागत

सरकार का लक्ष्य एमएसपी को एक ऐसे स्तर पर निर्धारित करना है। जो किसानों को न्यूनतम लाभ मार्जिन सुनिश्चित करता है और उनके उत्पादन खर्च को कवर करता है। सामान्यता उत्पादन की लागत का कम से कम 1.5 गुना।

एमएसपी के अंतर्गत शामिल फसलें

सरकार 22 अनिवार्य फसलों के लिए एमएसपी और गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी की घोषणा करती है। अनिवार्य फसलें हैं खरीफ मौसम की 14 फसलें, 6 रब्बी फसलें और 2 अन्य वाणिज्यिक फसलें।

फसलों की सूची

खरीफ फसलें: धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, तुअर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन, तिल, नाइजर सीड, कपास, 
रब्बी फसलें: गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड, सरसों, कुसुम 
अन्य फसलें खोपरा और जूट

एमएसपी को वैध बनाने में प्रमुख चुनौतियां

  1. सभी फसलों पर कानूनी एमएसपी लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है जो सरकारी बजट के लिए चुनौतियां उत्पन्न करता है।
  2. कानूनी एमएसपी कृषि में निजी निवेश को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से मूल्य विकृतियों और अनिश्चितता के कारण एमएसपी के अंतर्गत आने वाली फसलों में।
  3. धान और गन्ना जैसी एमएसपी समर्थित फसलों में जल की अत्यधिक खपत होती है। जिससे उन क्षेत्रों में जल की कमी की समस्या बढ़ जाती है। जहां उनकी बड़े पैमाने पर खेती होती है।
  4. कुछ फसलों के लिए एमएसपी को वैद बनाने से अनजाने में गैर एमएसपी फसलों की उपेक्षा हो सकती है। जिससे फसल विविधता, पोषण और स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें


Post Bottom Ad

Pages