राज्यसभा में जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2024 का पारित होना चर्चा का विषय बन गया है। इस विधेयक का उद्देश्य मौजूदा जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974 में संशोधन करना है। जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 1974 स्वतंत्र भारत का एक महत्त्वपूर्ण कानून था। इसने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी एसपीसीबी जैसे संस्थानों की स्थापना की। इस अधिनियम में औद्योगिक इकाइयों को कारखाने स्थापित करने से पहले राज्य बोर्डों से अनुमति लेने का आदेश दिया गया। इसने जल निकायों को प्रदूषण से बचाने के लिए निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण मानदंड भी निर्धारित किए।
जल प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण संशोधन विधेयक 2024 मूल अधिनियम में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तुत करता है। यह अनिवार्य सहमति और सीवेज के निर्वहन से संबंधित विशिष्ट धाराओं को छोड़कर अधिकांश अपराधों को अपराध की श्रेणी से पृथक करता है और उनके स्थान पर जुर्माने का प्रावधान करता है। अपराधियों को अब न्यायालय में मुकदमा चलाने के बजाय वित्तीय दंड का सामना करना पड़ेगा। उक्त संशोधन केंद्र को कुछ उद्योगों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से सहमति प्राप्त करने से छूट देने का अधिकार भी प्रदान करता है। इसका उद्देश्य निगरानी और नियामक बोझ के दोहराव को कम करना है।
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