ह्यूमन पेपिलोमा वायरस यानी एचपीवी के विभिन्न उपभेद अधिकांश ग्रीवा कैंसर की उत्पत्ति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एचपीवी के संपर्क में आने पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आमतौर पर शरीर को वायरस प्रभावित करने से रोकती है। हालांकि कुछ लोगों में वायरस वर्षों तक जीवित रहता है। जिससे कुछ गर्भाशय ग्रीवा कोशिकाएं कैंसर कोशिकाएं बन जाती हैं। एचपीवी वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले दो उप भेदों एचपीवी 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करती है। महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल में गर्भाशय ग्रवा यानी गर्भाशय के सबसे निचले हिस्से की सुरक्षा भी शामिल है। वहीं एचपीवी टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर एक महिला के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। दुनिया भर में महिलाओं में चौथा सबसे आम कैंसर के रूप में सर्वाइकल कैंसर हर साल 3 लाख से अधिक महिलाओं की जान ले लेता है। वहीं सर्वाइकल कैंसर से मरने वाली 10 में से नौ महिलाएं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहती हैं। वर्तमान जनसंख्या वृद्धि दर के साथ 2040 में भारत में सभी उम्र के लिए सर्वाइकल कैंसर के नए मामले की कुछ संख्या 19134 होने का अनुमान है। यह संख्या साल 2020 में दर्ज किए गए नए मामलों की संख्या में 54% की वृद्धि को दर्शाती है।
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस
यह प्रजनन अंगों का सबसे आम वायरल संक्रमण है। एचपीवी के 100 से अधिक प्रकार हैं। 40 से अधिक प्रकार के एचपीवी सीधे यौन संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। इन 40 में से दो जनना कैंसर का कारण बनते हैं। जबकि लगभग एक दर्जन एचपीवी गर्भाशय ग्रवा गुदा पेनाइल वल्वर और यूनी सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर का कारण बनते हैं।
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