आप किसी के भी भक्त हो, महादेव दाता है, आप राम के भक्त हैं, शिव जी की कथा सुनो और भगवान शिव से प्रार्थना करो, हे शिव हमें राम की भक्ति मिले, भगवान शिव आपको राम की भक्ति का दान कर देंगे। आप कृष्ण भक्त हैं, आप महादेव से प्रार्थना करो, महादेव हमें कृष्ण की भक्ति दे दो, भगवान महादेव आपको कृष्ण की भक्ति दे देंगे। महादेव भोले बाबा है, भोले भंडारी है, बहुत जल्दी देने वाले हैं। आपको राम की भक्ति मिल जाएगी, आपको कृष्ण की भक्ति मिल जाएगी, आप जिसके भी भक्त हैं, महादेव से प्रार्थना करो, महादेव तो देने वाले हैं और अंतर क्या है, अंतर कुछ भी नहीं है, वही राम है, वही कृष्ण है, वही विष्णु है, वही शिव है, सब एक है।
“सर्वम खल इदम ब्रह्म”
हमारे विद्वानों ने लिखा है कवियों ने लिखा है, तुम्ही ही राम हो, तुम्ही ही कृष्ण हो, तुम्ही ही देवों के देव महादेव हो, तुम्ही ब्रह्मा हो, तुम्ही शिव हो, तुम्ही ही शांति हो, तुम ही सब कुछ हो…………
कैसे प्राप्त होंगे भगवान के दर्शन ?
सबके मन में एक लालसा तो रहती है कि, हमें भगवान का दर्शन हो जाए। सबके मन में यह कामना रहती है, जो भी भक्ति के मार्ग पर चलते हैं। सबके मन में रहता है कि एक बार हमें भगवान का दर्शन हो जाए, यदि भगवान का दर्शन करना है तो भाई, कुछ तो शर्त है ना और कोई विशेष शर्त नहीं। भगवान ने एक ही बात कही कि मेरा दर्शन करना है मुझे पाना है।
निर्मल मन जन सो मोही पा..
मुझे पाना है तो भगवान कहते हैं, एक ही उपाय है अपने मन को निर्मल कर दो, अब मन को निर्मल करने के लिए क्या करना चाहिए,
तस्मा परम किंचित, मन शुद्ध, न विद्यते..
श्रीमद् भागवत से बढ़कर, श्री राम कथा से बढ़कर, भगवान की कथा से बढ़कर और मन शुद्ध कहां होता है..........
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