अनुच्छेद 361 क्या है
भारत के संविधान का अनुच्छेद 361 भारत के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपाल को दी गई उन्मुक्ति से संबंधित है। जो उन्हें आपराधिक कार्यवाही एवं गिरफ्तारी से बचाता है। अनुच्छेद 361 के अनुसार राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल या राज प्रमुख अपने पद की शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए उन शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने द्वारा किए गए किसी कार्य के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदाई नहीं होगा। इस प्रावधान में दो महत्त्वपूर्ण उपखंड भी हैं। राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के खिलाफ उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय में कोई भी आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी। राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल की गिरफ्तारी या कारावास की कोई प्रक्रिया उनके कार्यकाल के दौरान किसी भी न्यायालय से जारी नहीं की जाएगी।
संवैधानिक उन्मुक्ति से संबंधित अन्य प्रावधान
अनुच्छेद 361 ए के अनुसार संसद और राज्य विधान मंडल के किसी भी सदन की कोई भी वास्तविक रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए किसी व्यक्ति पर कोई नागरिक या न्यायालय कार्यवाही नहीं हो सकती है। संसद अनुच्छेद 105 और राज्य विधानमंडल अनुच्छेद 194 का कोई भी सदस्य संसद या किसी समिति में अपने द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए वोट के संबंध में किसी भी न्यायालय कार्यवाही के लिए उत्तरदाई नहीं होगा। विदेशी संप्रभु राजदूतों और राजनयिकों को आपराधिक एवं नागरिक कार्यवाही से छूट प्राप्त है।
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