सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने यूनिवर्सिटी
ग्रांट्स कमीशन (UGC) के प्रमोशन ऑफ इक्विटी रूल्स 2026 पर अस्थायी रोक (Stay) लगा दी है और इसे फिलहाल लागू नहीं होने का आदेश दिया है।
यह कदम मुख्य रूप से नए नियम के सेक्शन 3(C) पर गंभीर संवैधानिक आपत्तियों के कारण उठाया
गया है, जिन्हें याचिकाकर्ताओं ने अस्पष्ट, भेदभावपूर्ण और संभावित रूप से दुरुपयोग‑योग्य बताया है।
🔎 विवाद का मूल - Section 3(C) क्या कहता है?
नए UGC इक्विटी नियमों के सेक्शन 3(C) में जाति‑आधारित भेदभाव की परिभाषा दी
गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्ग (OBC) को ध्यान में
रखकर तय किया गया है, जिससे जनरल कैटेगरी के छात्रों/शिक्षकों को सुरक्षा नहीं मिलेगी।
साथ ही नियम की भाषा अस्पष्ट होने के कारण यह उच्च शिक्षा में समानता और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि नियमों की भाषा अस्पष्ट है और दुरुपयोग की संभावना अधिक है। कोर्ट ने
केंद्र सरकार और UGC को आधिकारिक जवाब देने के लिए कहा है।
कोर्ट ने फिलहाल UGC के 2012 के पुराने नियमों को लागू रखने का निर्देश दिया है ताकि शिकायतकर्ताओं के पास वैध विकल्प बना रहे।
📍 विरोध और प्रतिक्रियाएं
- देश भर के छात्रों और शिक्षण संस्थानों में नए नियमों के खिलाफ विरोध
प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं।
- कुछ समूहों का कहना है कि यह नियम जनरल कैटेगरी छात्रों के
अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं।
- वहीं समर्थक वर्ग मानता है कि ये नियम भेदभाव रोकने और समानता
बढ़ाने के लिए जरूरी हैं।
📅 अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 तक तय की है। इस दौरान सरकार और UGC को अपनी दलीलें
पेश करनी हैं। जवाब मिलने के बाद कोर्ट नए नियमों की संवैधानिक वैधता पर विस्तृत समीक्षा करेगा।
निष्कर्ष
इस विवाद का असर उच्च शिक्षा संस्थानों, छात्रों और
शिक्षा नीति पर बड़ा हो सकता है, इसलिए आगे की सुनवाई देश भर की शिक्षा व्यवस्था के लिए निर्णायक
साबित होगी।
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