उत्तराखंड के प्राचीन और पंचकेदारों में से तीसरे तुंगनाथ मंदिर को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाएगा। इस संदर्भ में केंद्र सरकार ने मार्च 2 हज़ार 23 में अधिसूचना जारी की थी। यह मंदिर राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में चंदना पर्वत पर स्थित है। ये एशिया में समुद्रतल से सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित अपनी तरह का एकमात्र प्राचीन शिवालय है। ये मंदिर 12,800 फीट की उंचाई पर स्थित है। ये भगवान शिव को समर्पित है। तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार मंदिरों से जुड़ा हुआ है जो पांडवों द्वारा बनाए गए थे। ऐसा माना जाता है कि पांडवों द्वारा ऋषि व्यास की सलाह पर इस मंदिर की नीव, अर्जुन ने रखी थी। मंदिर की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी। आकाश गंगा जलप्रपात तुंगनाथ के पास स्थित है।
उत्तराखंड के प्राचीन और पंचकेदारों में से तीसरे तुंगनाथ मंदिर को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाएगा। इस संदर्भ में केंद्र सरकार ने मार्च 2 हज़ार 23 में अधिसूचना जारी की थी। यह मंदिर राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में चंदना पर्वत पर स्थित है। ये एशिया में समुद्रतल से सबसे ऊंचे स्थान पर स्थित अपनी तरह का एकमात्र प्राचीन शिवालय है। ये मंदिर 12,800 फीट की उंचाई पर स्थित है। ये भगवान शिव को समर्पित है। तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार मंदिरों से जुड़ा हुआ है जो पांडवों द्वारा बनाए गए थे। ऐसा माना जाता है कि पांडवों द्वारा ऋषि व्यास की सलाह पर इस मंदिर की नीव, अर्जुन ने रखी थी। मंदिर की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी। आकाश गंगा जलप्रपात तुंगनाथ के पास स्थित है।
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