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बुधवार, 7 जून 2023

Cyclone Biparjoy: जाने चक्रवात बिपारजॉय के बारे में और जाने कैसे रखा जाता है चक्रवातों का नाम?

Cyclone Biparjoy

पूर्व-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर बना गहरे दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान बिपारजॉय या बिपोरजॉय में बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग(IMD) ने अब इसके एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई है। यह साइक्लोन उत्तर की ओर बढ़ रहा है और इसे लेकर IMD ने केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र व गुजरात में अलर्ट जारी किया है। इससे 40-50 से लेकर 60 किमी प्रति घंटे की गति से तेज़ हवाएँ चल सकती हैं। ग़ौरतलब है कि इससे पूर्व चक्रवात मोका, जो बंगाल की खाड़ी में बना था, बांग्लादेश और म्यांमार में बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बना था। चक्रवात बिपारजॉय या बिपोरजॉय का नाम बांग्लादेश ने दिया है

कैसे रखा जाता है चक्रवातों का नाम ?

एक विशेष स्थान पर एक समय में एक से अधिक चक्रवात हो सकते हैं। इसलिये भ्रम से बचने के लिए प्रत्येक उष्णकटिबंधीय तूफान को एक नाम दिया जाता है। सामान्य तौर पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नामकरण क्षेत्रीय स्तर पर नियमों के अनुसार किया जाता है। विश्व में 6 क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम विज्ञान केंद्र और 4 क्षेत्रीय उष्णकटिबंधीय चक्रवात चेतावनी केंद्र हैं। ये केंद्र सलाह जारी करते हैं व चक्रवाती तूफानों के नामकरण हेतु ज़िम्मेदार होते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग इन 6 क्षेत्रीय केंद्रों में से एक है। अटलांटिक और दक्षिणी गोलार्ध (हिंद महासागर व दक्षिण प्रशांत) में ट्रॉपिकल साइक्लोन को वर्णानुक्रम में नाम मिलते हैं, और महिलाओं और पुरुषों के नाम वैकल्पिक होते हैं। उत्तरी हिंद महासागर के राष्ट्रों ने वर्ष 2000 में इनके नामकरण हेतु एक नई प्रणाली शुरू की जिसमें नाम वर्णानुक्रम में देश-वार सूचीबद्ध हैं और न्यूट्रल जेंडर- वाइज़ हैं। रखे जाने वाले नाम नए होने चाहिए और दोबारा नहीं दोहराए जाने चाहिए। शब्द में अधिकतम आठ अक्षर हो सकते हैं और साथ ही यह किसी सदस्य देश के लिए अपमानजनक या आबादी के किसी भी समूह की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला नहीं हो।

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