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मंगलवार, 6 फ़रवरी 2024

परीक्षा के दौरान डिप्रेशन से रहें सावधान, बच्चों पर दें विशेष ध्यान

competitive exams

माता पिता ही बच्‍चों के लिए आदर्श(ideal) होते हैं और बच्चे अधिकतर आदतें अपने माता-पिता को देखकर ही अपने जीवन में अपनाते हैं। हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छे नम्बर लाए और कक्षा में सबसे आगे रहे। बच्चों की परीक्षा शुरू होते ही बच्चो से ज्यादा चिंता उनके माता-पिता को होती हैं। इस चिंता का असर सबसे ज़्यादा बच्चे के examएग्जाम परफॉरमेंस पर पड़ता है। बच्चों की परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त होना यह किसी समस्या का हल नहीं है। माता-पिता को यह समझना चाहिए कि उनको चिंतित देखकर बच्चे भी तनाव और मनोवैज्ञानिक जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते है। इसके बहुत जरूरी है कि माता-पिता अपनी इन आदतों और व्यवहार पर खास ध्यान दें और उनमें सुधार करें अर्थात सकारात्मक बदलाव लाएं।
कुछ माता-पिता Serious रहने के चक्‍कर में अपने बच्‍चों के प्रति अपने प्‍यार जाहिर ही नहीं करते। जिससे बच्चे और माता-पिता के बीच दूरियां पैदा होने लगती हैं। जिससे बच्चा माता-पिता से दूर होने लगता है और अपनी बातें मन में ही रखता है। अपने आपको अकेला महसूस करता है। यदि आप बचपन से बच्चो को प्यार करेगे, तो बुढापे तक आपका और उनका प्रेम बना रहेगा। जैसे आप बच्चो से प्यार चाहते है उसी प्रकार बच्चे को भी आपसे प्यार चाहिए।
बच्चो की परीक्षा के समय आपको बच्चों के साथ खुद का टाइमटेबल भी बनाना चाहिए। यह आम बात है कि बच्चो की आदते अलग-अलग होती है। कुछ बच्चे देर रात तक पढ़ना पसंद करते है, तो कुछ सुबह जल्दी उठकर पढ़ना पसंद करते हैं। तो ऐसे में आप खास ध्यान रखें की आप बच्चो पर प्रेशर न बनाएं, बल्कि बच्चा जिस समय पढ़ने में सही समझता है उसे उस समय पढ़ने दें। यदि हो सके तो आप बच्चों को बोलकर पढ़ने और याद करने की आदत डलवाएं। और यदि हो सके तो बच्चे को लिख कर याद करने को कहे। इससे उनके लिखने की प्रैक्टिश भी होगी और जब एग्जाम के दौरान ज्यादा लिखना पड़े तो उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नही होगी।
बच्‍चों की बात को समझने और सुनने का प्रयास करें यदि आप ऐसा नहीं करते तो बच्चो की मानसिक स्तिथि पर बुरा असर पड़ता है और वे आपकी बातों को भी वैल्‍यू देना बंद कर देते हैं। इसके लिए आप ज़्यादा से ज़्यादा बच्चो को समझे उनकी बात को वैल्यू दें। कोशिश करें कि आप बच्चो से ज्यादा प्यार से ही बात करें, उन्हें हर चीज के बारे में प्यार से समझाएं। कुछ पेरंट्स गार्ड की तरह हर वक्त बच्चों पर निगरानी रखते हैं जिससे बच्चा अपने विचार और भावनाओ को व्यक्त नहीं कर पाते, लेकिन आप ऐसा बिलकुल न करें और बच्चों को फ्री छोड़े ताकि उन्हें भी खुल के सोचने का मौका मिले।



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