भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 के दूसरे संस्करण में इंडियन ऑयल मार्केट आउटलुक टू 2030 नामक रिपोर्ट जारी की गई है। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत 2023 और 2030 के बीच वैश्विक तेल मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत बन जाएगा। साथ ही भारत की तेल मांग 2023 में 5.48 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़कर 2030 में 6.64 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो जाएगी। भारत वर्तमान में अमेरिका और चीन के बाद तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। हालांकि घरेलू उत्पादन में गिरावट के कारण यह निर्भरता बढ़ने की संभावना है। भारतीय तेल कंपनियां घरेलू तेल मांग में वृद्धि को पूरा करने के लिए रिफाइनिग क्षेत्र में भारी निवेश कर रही है। उर्जा दक्षता में सुधार से 2023-2030 की अवधि में 480 KB/D अतिरिक्त तेल की मांग से बचा जा सकेगा। भारत के परिवहन क्षेत्र के डी का कार्बोनाइजेशन में जैव ईंधन की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होने की उम्मीद है। साथ ही शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण सुविधाओं तक अधिक पहुंच प्राप्त करने के प्रयास, तेल की मांग में विस्तार को बढ़ावा दे सकते हैं। वहीं भारत की इथेनॉल मिश्रण दर लगभग 12% है। जो दुनिया में सबसे अधिक है। साल 2024 की चौथी तिमाही में गैसोलीन में राष्ट्रव्यापी इथेनॉल मिश्रण को दोगना करके 20% करने की अपनी समय सीमा पाच साल आगे बढ़ा दी है।
भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 यह भारत की सबसे बड़ी और एकमात्र सर्वव्यापी ऊर्जा प्रदर्शनी और सम्मेलन है। इस वर्ष इसे 6 से 9 फरवरी 2024 तक गोवा में आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य फोकस स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना और बढ़ावा देना और उन्हें ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करना है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी IEA यह एक स्वायत अंतर सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना साल 1974 में हुई थी। इसका लक्ष्य सदस्य देशों के लिए विश्वसनीय, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करना है। इसका मुख्यालय पेरिस फ्रांस में है। वर्तमान में इसमें भारत सहित 31 सदस्य देश हैं। इसका सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार देश को OECD का सदस्य देश होना चाहिए। लेकिन सभी OECD के सदस्य IEA के सदस्य नहीं है।
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