भारतीय रेलवे से रोज़ाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। जल्दबाज़ी या तकनीकी
कारणों से कई बार यात्री बिना टिकट या गलत टिकट के ट्रेन में चढ़ जाते हैं। ऐसे में यात्रियों के मन में डर रहता है कि कहीं
जुर्माना ज्यादा न लग जाए या कोई कार्रवाई न हो। लेकिन रेलवे के नियम यात्रियों को
कई अहम अधिकार देते हैं, जिनके बारे में जानना बेहद ज़रूरी है।
बिना टिकट यात्रा अपराध नहीं, नियमों में राहत
रेलवे नियमों के अनुसार, यदि कोई यात्री अनजाने में बिना टिकट ट्रेन में चढ़
जाता है, तो उसे अपराधी नहीं माना जाता। ट्रेन में मौजूद टीटीई (Travelling Ticket Examiner) का दायित्व है
कि वह यात्री से सही किराया और निर्धारित जुर्माना लेकर उसे वैध टिकट जारी करे।
टीटीई मनमानी नहीं कर सकता
नियमों में स्पष्ट किया गया है कि टीटीई यात्री से मनचाहा पैसा नहीं वसूल
सकता। टिकट या जुर्माना लेने के बाद रसीद देना
अनिवार्य है। बिना रसीद पैसे लेना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा टीटीई
यात्री के साथ बदसलूकी या धमकी नहीं दे सकता।
यात्रियों के ये हैं अहम अधिकार
- टीटीई को निर्धारित नियमों के तहत ही किराया और
जुर्माना लेना होगा
- यात्री को भुगतान की पूरी रसीद मिलना अनिवार्य है
- यात्री से दुर्व्यवहार करना गैरकानूनी है
- गलत व्यवहार की स्थिति में यात्री शिकायत दर्ज करा
सकता है
कहाँ और कैसे करें शिकायत
अगर किसी यात्री को लगता है कि उसके साथ गलत व्यवहार हुआ है या उससे नियमों के
खिलाफ पैसे लिए गए हैं, तो वह रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल या मैसेज करके शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा रेल मदद ऐप के जरिए भी टीटीई या अन्य रेलवे
कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की जा सकती है।
रेलवे का उद्देश्य यात्रियों की
सुरक्षा
रेलवे का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यात्रियों को
सलाह दी जाती है कि सफर से पहले टिकट जरूर लें, लेकिन गलती होने
पर घबराने के बजाय अपने अधिकारों की जानकारी रखें।
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