सरकार का दावा है कि इस पहल से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इंटरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क क्या है?
इस फ्रेमवर्क में टैरिफ, बाज़ार तक पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाएं और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
टैरिफ कटौती से भारतीय उत्पाद होंगे सस्ते
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी बाज़ार में भारतीय सामान सस्ता होगा, जिससे निर्यात बढ़ेगा और भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाज़ार तक पहुंच
· छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME)
· स्टार्टअप्स
· किसानों
· महिला उद्यमियों
· युवा कारोबारियों
तक भी पहुंच सकता है।
सरकार का कहना है कि निर्यात बढ़ने से देश में रोजगार सृजन को भी गति मिलेगी।
किन सेक्टरों को मिल सकता है सबसे ज़्यादा फायदा?
इस समझौते से कई प्रमुख उद्योगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं:
· कपड़ा और परिधान उद्योग
· चमड़ा और फुटवियर सेक्टर
· प्लास्टिक और रबर उत्पाद
· केमिकल और मशीनरी
· जेम्स और ज्वेलरी
· फार्मास्युटिकल्स
· होम डेकोर और हस्तशिल्प
कुछ सेक्टरों में भविष्य में टैरिफ पूरी तरह समाप्त किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है, हालांकि यह अंतिम समझौते पर निर्भर करेगा।
किसानों के हितों को लेकर सरकार का स्पष्ट संदेश
गेहूं, चावल, दूध, डेयरी और पोल्ट्री जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस इंटरिम ट्रेड फ्रेमवर्क से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू कृषि बाज़ार और किसानों की आय सुरक्षित रहे।
क्या यह फाइनल ट्रेड डील है?
आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम और औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों है महत्वपूर्ण?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेड फ्रेमवर्क:
· भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को मजबूत करेगा
· भारतीय निर्यात को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा
· निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा
· भारत की भूमिका को वैश्विक सप्लाई चेन में और सशक्त करेगा
हालांकि, इस डील का वास्तविक और दीर्घकालिक असर फाइनल समझौते के लागू होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।
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