मंडला जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर मंडला-जबलपुर मार्ग पर नर्मदा नदी के तट पर प्रकृति का अनुपम उपहार मिलता है। गांव बबेहा से 2 किमी दूर जंगल के रास्ते में तीनों तरफ नर्मदा और बरगी बांध के बैकवाटर से घिरा एक तालाब है। इसकी विशेषता यह है कि ठंड के मौसम में भी इस कुंड का पानी गर्म रहता है। इसी वजह से इसे गर्म पानी का कुंड भी कहा जाता है। यह बहुत पुराना कुंड बरगी के बैकवाटर के कारण गायब हो गया था। दो साल पहले इसे नए तरीके से पुनर्निर्मित किया गया है। इससे पहले भी इसका कायाकल्प किया गया था। करीब 250 फीट गहरे इस कुंड को पक्का बना दिया गया है। यह स्थान एक अच्छे पिकनिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया है। कहा जाता है कि इस कुंड के पानी में गंधक मिला है। इस कारण चर्म रोग के रोगियों के लिए इस कुंड में स्नान करना लाभकारी होता है। इस कुंड की विशेषता यह है कि इसका पानी गर्म रहता है। इसके पानी में गंधक होने के कारण यहां स्नान करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। यह बहुत पुराना कुंड है। पहले यह स्थान ज्यादातर पानी में डूबा रहता था। करीब 10 साल पहले इसकी ऊंचाई को बढ़ाकर इसका कायाकल्प किया गया है।
मंडला जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर मंडला-जबलपुर मार्ग पर नर्मदा नदी के तट पर प्रकृति का अनुपम उपहार मिलता है। गांव बबेहा से 2 किमी दूर जंगल के रास्ते में तीनों तरफ नर्मदा और बरगी बांध के बैकवाटर से घिरा एक तालाब है। इसकी विशेषता यह है कि ठंड के मौसम में भी इस कुंड का पानी गर्म रहता है। इसी वजह से इसे गर्म पानी का कुंड भी कहा जाता है। यह बहुत पुराना कुंड बरगी के बैकवाटर के कारण गायब हो गया था। दो साल पहले इसे नए तरीके से पुनर्निर्मित किया गया है। इससे पहले भी इसका कायाकल्प किया गया था। करीब 250 फीट गहरे इस कुंड को पक्का बना दिया गया है। यह स्थान एक अच्छे पिकनिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया है। कहा जाता है कि इस कुंड के पानी में गंधक मिला है। इस कारण चर्म रोग के रोगियों के लिए इस कुंड में स्नान करना लाभकारी होता है। इस कुंड की विशेषता यह है कि इसका पानी गर्म रहता है। इसके पानी में गंधक होने के कारण यहां स्नान करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है। यह बहुत पुराना कुंड है। पहले यह स्थान ज्यादातर पानी में डूबा रहता था। करीब 10 साल पहले इसकी ऊंचाई को बढ़ाकर इसका कायाकल्प किया गया है।
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