देश में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर एक बड़ी और एक्सक्लूसिव खबर सामने आ रही है। आने वाले महीनों में CPI (Consumer Price Index) यानी खुदरा महंगाई मापने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। इसका सीधा असर RBI की मॉनिटरी पॉलिसी, ब्याज दरों, होम लोन, EMI और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।
🔍 क्या बदलने वाला है CPI का फार्मूला?
सूत्रों के मुताबिक सरकार इन्फ्लेशन बास्केट (महंगाई की टोकरी) को अपडेट करने की तैयारी में है। यह नई CPI बास्केट फरवरी महीने में घोषित की जा सकती है।
वर्तमान में:
फूड आइटम्स का वेटेज: लगभग 46%
नई व्यवस्था में:
फूड वेटेज घटकर 36% से 38% के बीच आ सकता है
वहीं एजुकेशन, हेल्थ, हाउसिंग, ट्रैवल और अन्य सेवाओं का वेटेज बढ़ाया जाएगा
🏙️ शहरी और ग्रामीण महंगाई का फर्क होगा कम
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि:
शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को महंगाई में राहत का असली असर महसूस होगा
RBI जब कहेगा कि महंगाई घटी है, तो उसका असर लोगों की पॉकेट पर भी दिखेगा
शहरी और ग्रामीण महंगाई के आंकड़ों में जो अंतर दिखता है, वह ज्यादा व्यावहारिक और संतुलित हो जाएगा
🏦 RBI की मॉनिटरी पॉलिसी पर क्या होगा असर?
सूत्रों के अनुसार:
CPI फार्मूले की घोषणा फरवरी 2026 में संभव
- इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष (FY 2026-27) की पहली या दूसरी मॉनिटरी पॉलिसी (अप्रैल या जून) में👉 महंगाई कैलकुलेशन का नया तरीका लागू किया जा सकता है
जब महंगाई मापने का तरीका बदलेगा:
CPI डेटा बदलेगा
RBI के फैसलों के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य आर्थिक पैरामीटर्स भी एडजस्ट होंगे
📊 ब्याज दरों में 50 BPS कट का मजबूत संकेत
इसी वजह से सूत्रों का मानना है कि:
आने वाले समय में 50 बेसिस पॉइंट (0.50%) तक रेट कट की पूरी गुंजाइश बनी हुई है
इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते हो सकते हैं
EMI में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ेगी
✅ आम आदमी के लिए क्या मायने रखती है यह खबर?
महंगाई के आंकड़े होंगे ज्यादा रियलिस्टिक
ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत
शहरी मध्यम वर्ग को सीधी राहत
आर्थिक फैसलों में पारदर्शिता और संतुलन

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें