शनि कालपुरुष का दुख है। यदि जन्मकुंडली में शनि की स्थिति अनुकूल न हो तो शनि की साढ़ेसाती व दशा आदि में विशेष कष्ट की अनुभूति होती है। साढ़ेसाती का संबंध चंद्रमा अर्थात् हमारे मन से है। इसलिए इस अवधि में जातक का विभिन्न कष्टों से गुजरने के कारण मनोबल गिरने लगता है तथा आत्मविश्वास व साहस में विशेष कमी आने लगती है। ऐसा प्रभाव विशेष रूप से तब होता है जब कुंडली में शनि की स्थिति अधिक अशुभ हो। ऐसे में यदि मंगल भी कमजोर हो तो जातक विपरीत परिस्थितियों का प्रतिकार करने में अपने को अक्षम महसूस करने लगता है क्योंकि मंगल कालपुरुष का बल है इसलिए यदि कुंडली में मंगल बलवान हो तो जातक अपने बल, पराक्रम, प्रभाव, आत्मविश्वास, आत्मबल तथा सहनशक्ति व तेजस्विता से शनि के प्रकोप को सहन करने में सक्षम हो जाता है। साढ़ेसाती में शनि जातक के अहंकार को नष्ट करना चाहता है अतः इस समय जातक को किसी से वैर मोल नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह विरोध और अधिक परेशानी लेकर आता है अपितु हनुमान जी की तरह से विनम्रता व सादगी से व्यवहार करना चाहिए व अपने कनिष्ठ की अवज्ञा नहीं करनी चाहिए व साथ में अपने जूनियर लोगों से स्नेह पूर्ण संबंध रखना चाहिए। इस प्रकार से साढ़ेसाती शांतिपूर्वक व्यतीत हो जाती है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के शुरू होने पर जातक को अनेक प्रकार के कष्ट प्राप्त होते हैं। समय रहते निम्नांकित उपाय करने से शनि प्रदत्त कष्टों से बचा जा सकता है:
- यदि मानसिक तनाव अधिक हो तो सातमुखी रुद्राक्ष माला धारण करनी चाहिए तथा उस पर शनि के तन्त्रोक्त मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का जप रुद्राक्ष माला पर 108 बार करके शनिवार के दिन छाया दान करना चाहिए। अन्य मंत्रों का उत्कीलन करना पड़ता है परंतु उपरोक्त तंत्रोक्त मंत्र बिना उत्कीलन के भी फलीभूत हो जाता है।
- साढ़े साती में 1-14 मुखी रुद्राक्ष माला धारण करने से सभी प्रकार के शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिलता है। शनि के जागृत व सिद्ध मंदिर के दर्शन करें व तेल चढ़ाएं। नजरदोष होने पर हनुमान पूजा करके लाल टीका लगाएं। शनि शांति के लिए तेल व तिल के दान के अतिरिक्त हनुमान चालीसा, संकटमोचक हनुमत् स्तोत्र, हनुमानाष्टक, हनुमान मंत्र, सुंदरकांड, पंचमुखी हनुमान कवच, हनुमानसहस्रनाम, बजरंग बाण आदि के पाठ के अतिरिक्त हनुमान के मंदिर में सिंदूर चढ़ाया जाता है। यदि सरकारी परेशानी है अथवा नौकरी में बाधाएं आ रही हैं जैसे अधिकारी से मतभेद/तनाव है तो प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें। इसे शनिवार को आरंभ करके शुक्रवार को संपन्न करें।
- यदि आर्थिक हानि हो गई है तो मंगल व शनिवार के दिन मांस मदिरा का सेवन न करें, मंगलवार का व्रत करें व हनुमान जी को चोला चढ़ाएं, तथा 800 ग्राम गुड़ जल में प्रवाहित करें। हनुमान सहस्रनाम का पाठ प्रतिदिन करें व 43 वें दिन गुड़ व चना का प्रसाद बांटें। इसके अतिरिक्त शनिवार के दिन काली दाल, काला वस्त्र आदि शनि की वस्तुओं का दान करें।
- यदि घर में कलह हो तो सायंकाल घर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- विवाह बाधा होने पर माता लक्ष्मी, भैरव बाबा, श्री हनुमान जी व श्री सिद्धिविनायक गणपति गणेश जी की संयुक्त उपासना करें। ऐसा करने से मांगलिक दोष की शांति होगी व शनि व मंगल जनित विवाह बाधा दोष शांत होगा।
- यदि घर में बच्चे जिद्दी हो रहे हैं, कहना नहीं मानते तो हनुमान जी की पूर्ण सेवा भाव व ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए पूजा करें व मंगलवार का व्रत करें तथा स्वयं भोजन पकाकर खाएं। आपकी परेशानी अवश्य दूर होगी।
- साढ़ेसाती जनित अति कष्ट व शारीरिक कष्ट से निवारण हेतु शुक्रवार को सवा किलो या सवा पाव काले चने पानी में भिगो दें। शनिवार को पानी से निकालकर चने को काले कपड़े में बांध लें। साथ में एक कच्चा कोयला, एक रुपये का सिक्का व चुटकी भर काले तिल बांध लें। सिर के ऊपर से फिराकर इन सामग्रियों को यमुना जी में विसर्जित करें। यह क्रिया 5 से 8 बार करने से सभी प्रकार के शनि कष्ट दूर हो जाते हैं।
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