प्रतिदिन सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें तथा सूर्य की सात परिक्रमा करें व सूर्यदेव को नमस्कार करें।
गंभीर रोग से मुक्ति हेतु
- यदि कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रस्त हो तो 64 अक्षरीय महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप कराएं : ॐ ह्रौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः, ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।। ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ। शनि साढ़ेसाती में अच्छी पढ़ाई के हेतु रुद्राक्ष 4, 5, 6 व 7 मुखी और गणेश रुद्राक्ष का लॉकेट धारण करें एवं केसर हल्दी का तिलक प्रतिदिन माथे पर लगाएं। "ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः" मंत्र की एक माला जप नित्य प्रति करें।
शनि साढ़ेसाती में आर्थिक कष्ट से मुक्ति हेतु
- गुरुवार को गाय को दो आटे के पेड़े पर थोड़ा हल्दी लगाकर खिलाएं। इसके साथ ही गुड़ व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है।
- घर में स्फटिक श्रीयंत्र व कार्य स्थल पर सूर्यमणि श्रीयंत्र स्थापित करें तथा श्रीसूक्त व लक्ष्मीसूक्त का नित्यप्रति पाठ करें। कुबेर यंत्र को उत्तर दिशा में स्थापित करें। आठ छुआरे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें।
शनि साढ़ेसाती में व्यापारिक क्षेत्र में समस्या निवारण हेतु
- कई बार एक मशीन के न काम करने से पूरी उत्पादकता प्रभावित हो जाती है। जो मशीन काम न कर रही हो उस पर विश्वकर्मा की पूजा करके मत्स्य यंत्र चिपका दें तथा नित्यप्रति धूप दीपादि से पूजा करें।
- यदि व्यापार में लाभ कम हो तो 16 छुआरे लाल कपड़े में बांधकर मंदिर में रखें व व्यापार वृद्धि यंत्र कार्यालय में स्थापित करें।
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