यह सही है कि साढ़ेसाती के समय व्यक्ति को कठिनाईयों एवं परेशानियों का सामना करना होता है परंतु इसमें घबराने वाली बात नहीं है। इसमे कठिनाई और मुश्किल हालत जरूर आते हैं परंतु इस दौरान व्यक्ति को कामयाबी भी मिलती है। बहुत से व्यक्ति साढ़ेसाती के प्रभाव से सफलता की उंचाईयों पर पहुंच जाते हैं। साढ़ेसाती व्यक्ति को कर्मशील बनाती है और उसे कर्म की ओर ले जाती है। हठी, अभिमानी और कठोर व्यक्तियों से यह काफी मेहनत करवाती है।
प्रथम चरण का फल
साढ़ेसाती का प्रथम चरण-कहते हैं कि इस चरण में शनि मस्तक पर रहता है। इस चरणावधि में व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। आय की तुलना में व्यय अधिक होते हैं। सोचे गए कार्य बिना बाधाओं के पूरे नहीं होते हैं। आर्थिक तंगी के कारण अनेक योजनाएं आरम्भ नहीं हो पाती हैं। अचानक धनहानि होती है, अनिद्रा रोग हो सकता है एवं स्वास्थ्य खराब रहता है। भ्रमण के कार्यक्रम बनकर बिगड़ते रहते हैं। यह अवधि बुजुर्गों हेतु विशेष कष्टकारी सिद्ध होती है। मानसिक चिन्ताओं में वृद्धि हो जाती है। पारिवारिक जीवन में बहुत सी कठिनाईयां आती हैं और परिश्रम के अनुसार लाभ नहीं मिलता है।
साढ़ेसाती का दूसरा चरण
व्यक्ति को शनि साढ़ेसाती की इस अवधि में पारिवारिक तथा व्यवसायिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं। उसके संबंधी भी उसको कष्ट देते हैं, उसे लम्बी यात्राओं पर जाना पड़ सकता है और घर-परिवार से दूर रहना पड़ता है। रोगों में वृद्धि होती है, संपत्ति से सम्बन्धित मामले परेशान कर सकते हैं। मित्रों एवं स्वजनों का सहयोग समय पर नहीं मिल पाता है। कार्यों के बार-बार बाधित होने के कारण व्यक्ति के मन में निराशा घर कर जाती है। कार्यों को पूर्ण करने के लिये सामान्य से अधिक प्रयास करने पड़ते हैं। आर्थिक परेशानियां तो मुंह खोले खड़ी रहती हैं।
साढ़ेसाती का तीसरा चरण
शनि साढ़ेसाती के तीसरे चरण में भौतिक सुखों में कमी होती है, उसके अधिकारों में कमी होती है और आय की तुलना में व्यय अधिक होता है, स्वास्थ्य संबन्धी परेशानियां आती हैं, परिवार में शुभ कार्य बिना बाधा के पूरे नहीं होते हैं। वाद-विवाद के योग बनते हैं और संतान से वैचारिक मतभेद उत्पन्न होते हैं। यह अवधि कल्याणकारी नहीं रहती है। इस चरण में वाद-विवादों से बचना चाहिए।
शनि की ढैय्या
जन्म चंद्र से जब गोचर का शनि चौथे अथवा आठवें भाव में गोचर करता है तब शनि की ढैय्या आरंभ होती है। ढैय्या अर्थात ढाई साल का समय। जन्म कुंडली का अच्छी तरह से विश्लेषण करने के बाद ही शनि की ढैय्या का प्रभाव बताना चाहिए। यह अच्छी अथवा बुरी तब होगी जब कुंडली में समस्याएँ होंगी।
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