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गुरुवार, 6 जून 2024

भगवान शनिदेव की साढ़ेसाती से अभिप्राय

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जन्मकुंडली में चन्द्र स्थित राशि, जन्मराशि कहलाती है। जब जन्म राशि से गोचर में शनि द्वादश भाव में आता है तब साढ़ेसाती प्रारंभ होती है। यह साढ़ेसाती का प्रथम चरण कहलाता है। जन्मराशि अर्थात चन्द्र पर शनि के गोचर का काल साढ़ेसाती का दूसरा चरण और जन्मराशि से द्वितीय भाव में गोचरस्थ शनि का प्रवेश काल तृतीय चरण कहलाता है। इन राशियों में शनि करीब ढाई-ढाई वर्ष रहता है और तीन राशियों में साढ़ेसात। यही साढ़े सात साल साढ़ेसाती के नाम से जाने जाते हैं। साढ़ेसाती का प्रभाव साढ़े सात वर्ष एवं ढैय्या का प्रभाव ढाई वर्ष रहता है। सामान्यतया साढ़ेसाती मनुष्य के जीवन में तीन बार आती है। परन्तु जिनकी आयु 90 वर्ष से अधिक हो उनके जीवन में शनि साढ़ेसाती का चार बार आगमन होता है। प्रथम बचपन में, द्वितीय युवावस्था में तथा तृतीय वृद्धावस्था में तथा चतुर्थ 90 वर्ष की आयु के बाद। प्रथम साढ़ेसाती का प्रभाव शिक्षा एवं माता-पिता तथा भाई-बहनों पर पड़ता है। द्वितीय साढ़ेसाती का प्रभाव कार्यक्षेत्र, आर्थिक स्थिति एवं परिवार पर पड़ता है। परन्तु तृतीय साढ़ेसाती स्वास्थ्य पर अधिक प्रभाव करती है। जिन व्यक्तियों को चतुर्थ साढ़ेसाती का प्रभाव मिलता है उन्हें साढ़ेसाती मोक्ष प्रदान करती है। साढ़ेसाती का प्रभाव जातक के जीवन में शुभफलकारी और अशुभफलकारी हो सकता है। इस अवधि में जातक को जीवन के अनेक नवीन अनुभव सीखने को मिलते हैं। इस अवधि में जातक को सामान्य से अधिक संघर्ष की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है व इस अवधि में जातक के रोगग्रस्त होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, अनेक बार असफलताओं का सामना भी करना पड़ता है। यह आवश्यक नहीं है कि यह सारी अवधि एक जैसी हो, यह समय उतार-चढ़ाव वाला भी हो सकता है।
इसे उपायों से कम कष्टपूर्ण बनाया जा सकता है जिससे इसके परिणाम सामान्य व शुभ होंगे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार साढेसाती तब बनती है जब शनि गोचर में जन्म शुभ होते प्रथम, द्वितीय और द्वादश भाव से गुजरता है। शनि एक राशि से गुजरने में ढाई वर्ष का समय लेता है। इस तरह तीन राशियों से गुजरते हुए यह साढ़े सात वर्ष का समय लेता है जो साढ़ेसाती कही जाती है। सामान्य अर्थ में साढ़ेसाती का अर्थ हुआ सात वर्ष छः मास। साढ़ेसाती के दौरान माना जाता है कि व्यक्ति को निराशा, असंतोष, विवाद, कलह और विपरीत परिणामों का सामना करना होता है, परंतु पूरी तरह से इसे स्वीकार करना सही नहीं है। साढ़ेसाती सभी के लिए बुरा परिणाम लाता है ऐसा नहीं है। उदाहरणस्वरूप अगर शनि योग कारक है तो इस बात की कोई संभावना नहीं बनती कि शनि व्यक्ति को परेशान करेगा। अधिकतर लोगों को साढ़ेसाती के तीन चरणों से गुजरना होता है। चौथे चरण का सामना बहुत कम लोगों को करना होता है। राशि चक्र में साढ़ेसाती फिर से लौटकर तब आती है जब पहली साढ़ेसाती के 30 वर्ष पूरे हो जाते हैं।



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