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शनिवार, 29 अप्रैल 2023

भारतीय कला इतिहास के प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की जयंती

Raja Ravi Varma

राजा रवि वर्मा की जयंती आज यानी उनतीस अप्रैल को भारतीय कला इतिहास के प्रसिद्ध चित्रकार और कलाकार राजा रवि वर्मा की जयंती है। दो हज़ार तेईस में इनकी एक सौ पचहत्तर वीं जयंती मनाई जा रही है। रवि वर्मा का जन्म उनतीस अप्रैल अठारह सौ अड़तालीस को तत्कालीन त्रावणकोर रियासत वर्तमान तिरुवनंतपुरम के किलिमानूर बहल में हुआ था। इनके चाचा राजा राजा वर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और कला की प्रारंभिक शिक्षा दी बाद में रवि वर्मा ने त्रावणकोर की शासक महाराजा आईलयम थिरुनाल के संरक्षण में चित्रकला सीखी वर्मा पहले भारतीय थे। जिन्होंने परिप्रेक्ष्य रचना की पश्चिमी तकनीकों का उपयोग कर उन्हें भारतीय विषयों, शैलियों और विषयों के अनुकूल बनाया। इन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति के पात्रो तथा हिंदू महाकाव्य और धर्म पद पर चित्र बनाए। रवि वर्मा ने अपनी चित्रकारी के जरिये देवी देवताओं को घर घर तक पहुँचाया। इनकी प्रमुख कृतियों में दम महाराष्ट्रियन, लेडी शकुंतला, द मिल्क मेड एक्स्पेक्टेशन, हरिश्चंद्र इन डिस्ट्रेस, जटायु वध आदि शामिल हैं। उन्होंने अठारह सौ तिहत्तर में अपनी पेंटिंग नायर लेडी अडोर लिंग हर हेर के लिए गवर्नर का स्वर्ण पदक जीता। रवि वर्मा ने भारतीय परंपराओं से बाहर निकलते हुए चित्रकारी को एक नया आयाम दिया। इन्होने यूरोपीय यथार्थवादी ऐतिहासिक चित्रकला शैली के साथ हिंदू पौराणिक विषय वस्तु को एकजुट किया। लक्ष्मी विलास महल के संग्रहालय में इनके चित्रों का एक बड़ा संग्रह मौजूद है। इनकी चित्रों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। दो अक्टूबर उन्नीस सौ छे को अट्ठावन वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया। इनके सम्मान में राजा रवि वर्मा पुरस्कार की भी स्थापना की गई है।

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