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शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

Right to Marry: विवाह का अधिकार

Right to Marry

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि विवाह का अधिकार "पूर्ण अधिकार" नहीं है। शफीन जहां बनाम अशोक केएम (2018) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 21 के तहत अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह के अधिकार को बरकरार रखा है। विवाह करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) के तहत भी सुरक्षित है, जो भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने के. एस. पुट्टास्वामी बनाम यूओआई (2017) के फैसले में कहा गया है कि "पारिवारिक जीवन के चुनाव की अधिकार" एक मौलिक अधिकार है। परिवार शुरू करने के अधिकार के अंतर्गत मानवाधिकार चार्टर के तहत विवाह का अधिकार भी दिया गया है। विवाह का अधिकार एक सार्वभौमिक अधिकार है और यह हर किसी के लिए उपलब्ध है, चाहे उनका लिंग कुछ भी हो।

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