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मंगलवार, 7 फ़रवरी 2023

पुरानी पेंशन स्कीम मामले में खुशखबरी, कर्मचारियों को खुश करने के लिए सरकार खोज सकती है 3 तरीके

Old Pension Scheme

सरकारी कर्मचारियों में पुरानी पेंशन योजना की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। यह चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है और इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होंगे तो 2024 में आम चुनाव हैं। इससे पहले सरकार और पेंशन नियामक के भीतर तीन उपायों पर मंथन चल रहा है। ऐसे में एक उपाय यह है कि पुरानी पेंशन की तरह पिछले वेतन के आधे तक पेंशन मिल जाए, लेकिन इसके लिए कर्मचारी से अंशदान लिया जाए। ऐसी योजना आंध्र प्रदेश में चलाई जा रही है। सरकार और पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के बीच इस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है।

दूसरा उपाय

मौजूदा एनपीएस में ही न्यूनतम पेंशन तय करना है। एनपीएस को लेकर शिकायत यह है कि कर्मचारी का योगदान तय होता है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता। इस पर काम लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन बोर्ड की मंजूरी बाकी है। हालांकि संकेत हैं कि इसमें न्यूनतम रिटर्न 4 से 5 फीसदी तक हो सकता है, जो बेहद कम माना जाएगा, गारंटी के कारण खर्च बढ़ेगा। वैसे अगर बाजार बेहतर रिटर्न देता है तो पेंशन मिनिमम रिटर्न से 2-3 फीसदी तक ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा मौजूदा एनपीएस में मैच्योरिटी राशि का 60 फीसदी कर्मचारी को जाता है। अगर इस पैसे का इस्तेमाल पेंशन के लिए भी किया जाए तो पेंशन की रकम बढ़ जाएगी।

तीसरा उपाय 

अटल पेंशन योजना की तरह सभी को न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाए। पीएफआरडीए फिलहाल यह योजना चला रहा है, जिसमें 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की पेंशन अंशदान के आधार पर तय की जाती है। PFRDA सभी के लिए अटल पेंशन योजना का दायरा बढ़ाने और 5000 रुपये की सीमा को हटाने के लिए तैयार हो सकता है, बशर्ते गारंटी में कोई वित्तीय कमी होने पर सरकार मदद की जिम्मेदारी ले, तीनों उपायों पर विचार करने की जिम्मेदारी पीएफआरडीए की है, लेकिन मुश्किल यह है कि फिलहाल इसके नए अध्यक्ष की नियुक्ति का इंतजार है। पिछले अध्यक्ष का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ था। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद इस पर काम तेजी से बढ़ सकता है।

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