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गुरुवार, 3 जून 2021

पंजाब में 2022 तक किसानों के बाद अब दलित वोट बैंक बना मुद्दा, हर राजनीतिक दल खेल रहा दाव


फरवरी 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा के चुनाव को देखते हुए इन दिनों पार्टियां ताश की राजनीति करने की होड़ में हैं। पिछले साल जब केंद्र सरकार ने एक ही दिन तीन कृषि अध्यादेश जारी किए थे तो, पंजाब में इसका कड़ा विरोध हुआ था। सभी किसान संगठनों ने एकजुट होकर विरोध करना शुरू कर दिया। क्यों कि उन दिनों अकाली दल भाजपा के साथ केंद्र में शासन कर रहा था, इसलिए उसने कृषि अध्यादेशों का समर्थन करना शुरू कर दिया।
कांग्रेस ने मौके का फायदा उठाया और भाजपा के साथ शिरोमणि अकाली दल से भी भिड़ गए। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे को सरकार के स्तर पर और पार्टी प्रमुख सुनील जाखड़ ने पार्टी स्तर पर उठाना शुरू कर दिया। कैप्टन ने जहां सर्वदलीय बैठक बुलाई, वहीं जाखड़ इन तीन अध्यादेशों के खिलाफ विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में बोलने लगे।
आम आदमी पार्टी, लोक इंसाफ पार्टी आदि पंजाब में किसानों के पक्ष में माहौल बनते देख किसानों के समर्थन में उतर आए। किसानों के वोट बैंक को साथ-साथ चलते देख अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया। तीन कृषि कानूनों के विरोध में मार्च निकाले गए।
कांग्रेस के राहुल गांधी भी तीन दिवसीय दौरे पर पंजाब आए और ट्रैक्टर यात्रा निकाली। यानी हर पार्टी किसान कार्ड खेलने में लगी हुई थी। इस बीच बीजेपी ने यह कहकर दलित कार्ड खेला है कि अगर बीजेपी 2022 में सत्ता में आती है तो उनका सीएम दलित वर्ग से होगा। बस फिर क्या था। सभी पार्टियाँ किसान कार्ड भूलकर, दलित कार्ड की राजनीति में उतर आए।
शिअद प्रमुख सुखबीर बादल ने यह भी घोषणा की, कि अगली सरकार में वह दलित वर्ग से उपमुख्यमंत्री बनाएंगे। कांग्रेस कहाँ पीछे हटने वाली थी? पार्टी के दलित वर्ग के मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सभी दलित विधायकों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया और एक बैठक की और मुख्यमंत्री को तीन पन्नों का पत्र लिखा जिसमें दलितों के मुद्दों को उठाया गया। 
इधर, अब हिंदू वर्ग में भी उथल-पुथल मची हुई है। पंजाब में जहां कांग्रेस हिंदुओं को राज्य का मुखिया बनाने के लिए एक नेता की तलाश में है। वहीं पार्टी के पूर्व विधायक अश्विनी सेखरी ने इस आपदा में मौके की तलाश शुरू कर दी है। वह लगातार मुख्यमंत्री पर हिंदू नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। साफ है कि वह पिछले चार साल से खामोश बैठे हुए कहीं न कहीं बड़े पद की तलाश में हैं।

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