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सोमवार, 22 नवंबर 2021

बढ़ते प्रदूषण में अपने फेफड़ों को इन तरीकों से बनाएं मजबूत


देश के विभिन्न हिस्सों में जहरीली हवाओं ने प्रदूषण को कई गुना बढ़ा दिया है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही पिछले कई सालों से ऐसी समस्याएं हमें परेशान करने लगी हैं। प्रदूषण की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी फेफड़ों पर पड़ती है। जिन लोगों को सांस की समस्या होती है, उन्हें सर्दी में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रदूषण के कारण गले में जलन, ब्रोंकाइटिस से लेकर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी समस्याएं कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे में फेफड़ों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। इसलिए जरूरी है कि फेफड़े अंदर से इतने मजबूत हों कि फेफड़ों पर प्रदूषण का असर बहुत कम हो। तो आइए हम आपको यहां उन खाद्य पदार्थों के बारे में बताते हैं, जिनसे आपके फेफड़े हमेशा के लिए स्वस्थ रहेंगे और उन पर प्रदूषण का असर भी बहुत कम होगा।

चुकंदर

हमारे आस-पास कई ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनके सेवन से फेफड़े मजबूत हो सकते हैं। चुकंदर इन्हीं में से एक है। चुकंदर नाइट्रेट का एक समृद्ध स्रोत है। नाइट्रेड की वजह से फेफड़ों की कार्यप्रणाली सही रहती है। यह रक्त वाहिकाओं को आराम देने में मदद करता है। यह रक्तचाप के स्तर को भी कम करता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति करने की क्षमता को बढ़ाता है। चुकंदर के पत्ते फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

काली मिर्च

काली मिर्च विटामिन सी का एक बड़ा स्रोत है। यह पानी में घुलनशील पोषक तत्व है। इसलिए काली मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट का असर शरीर पर तुरंत पड़ता है। जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें विटामिन सी की आवश्यकता अधिक होती है क्योंकि धुएं के बुरे प्रभावों के कारण धूम्रपान करने वाले व्यक्ति में एंटीऑक्सीडेंट जमा नहीं होते हैं। इसलिए धूम्रपान करने वाले को रोजाना 35 मिलीग्राम विटामिन सी लेना चाहिए। काली मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट फेफड़ों को मजबूत करते हैं।

गुड़ खाओ

गुड़ में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो श्वसन तंत्र को साफ करते हैं। गुड़ श्वसन तंत्र को साफ करता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसके अलावा श्वसन तंत्र में जो भी हानिकारक जीव चिपक जाते हैं, उन्हें शरीर से बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसलिए गुड़ एक प्राकृतिक सफाई एजेंट है।

नीलगिरी तेल

नीलगिरी का तेल प्रदूषण के दौरान शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में बहुत फायदेमंद होता है। नीलगिरी के तेल को नाक में डालने से श्वसन तंत्र में गए सभी विषैले पदार्थ बाहर निकल जाएंगे। इससे चेस्ट कंजेशन भी ठीक होगा।

लहसुन

अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसलिए अदरक कई बीमारियों को दूर करने में भी मददगार होता है। सर्दियों में अदरक के कई फायदे होते हैं। प्रदूषण के दौरान अदरक और तुलसी के पत्तों का सेवन करने से सांस संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही अदरक फेफड़ों को भी मजबूत बनाता है।

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