कोयले की कमी को लेकर विपक्ष ने फैलाया भ्रम, राज्यों ने रिमाइंडर के बावजूद स्टॉक नहीं बढ़ाया: केंद्र सरकार
बिजली संकट के साथ कोयले की किल्लत को लेकर देश में सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार को घेर रहे हैं। इस बीच सरकार ने विपक्ष पर कोयले की किल्लत को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि फिलहाल देश में रोजाना बिजली और कोयले की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। भारी बकाया के बावजूद किसी भी राज्य को कोयले की आपूर्ति बंद नहीं की गई। सूत्रों ने यह भी कहा है कि केंद्र राज्यों द्वारा आवश्यक सभी मांगों को पूरा कर रहा है। इसके साथ ही कोयले की कमी की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने अगले पांच दिनों में कोयले का उत्पादन प्रतिदिन 19.4 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन करने की उम्मीद जताई है। कई राज्यों में बिजली की कमी की सूचना मिलने के बाद सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि एक महीने के भीतर स्थिति सामान्य हो जाएगी। सूत्रों ने कहा कि संकट मुख्य रूप से मानसून के बाद के मौसम में घरेलू कोयला खदानों की बाढ़ और इसकी वैश्विक कीमतों में उछाल के कारण है। हालांकि, अब पिछले चार दिनों में कोयले का स्टॉक बढ़ना शुरू हो गया है।
कोयला भंडार नहीं उठा रहे राज्य: सरकारी सूत्र
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि कोयला खदानों में बाढ़ और अंतरराष्ट्रीय दरों में बढ़ोतरी के अलावा मौजूदा हालात का एक और कारण यह है कि राज्य पर्याप्त कोयले का खनन नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, सूत्रों ने कहा कि राज्य बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोल इंडिया लिमिटेड(CIL) से कोयला स्टॉक नहीं उठा रहे हैं। सरकारी सूत्रों ने खुलासा किया, "राज्यों को कोल इंडिया के बकाया के रूप में लगभग 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।"


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