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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

लोकलुभावन फैसलों के साथ छवि-सुधार की कवायद में पंजाब कांग्रेस


कांग्रेस आलाकमान ने संगठन और सरकार का चेहरा बदल दिया, लेकिन वास्तविक मुद्दों पर स्थिति वही है। प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की यह प्रतिक्रिया भी कुछ इसी तरह रेखांकित करती है कि राज्य के वास्तविक मुद्दों पर काम नहीं हो रहा है। यानी उनकी नजर में नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का एक महीने का भी प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वह सरकार और आलाकमान को चेतावनी देते हुए अपने 13 सूत्री एजेंडे से आक्रामक हैं। सिद्धू की तरह आनंदपुर साहिब से सांसद और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी भी आलाकमान से लेकर प्रदेश कांग्रेस तक सरकार के कामकाज पर आईना दिखाते हुए मुद्दों पर आने की बात कर रहे हैं। 
सवाल यह है कि बेअदबी और उसके बाद पुलिस फायरिंग के मामले में न्याय दिलाने, नशीली दवाओं और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने और निजी कंपनियों से बिजली समझौते रद्द करने जैसे मुद्दे अब मौन क्यों हो गए हैं? इसलिए, क्योंकि जिस समय सरकार को इन पर एक-एक करके फैसले लेने चाहिए, कई मंत्रियों का जोर कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ बैरिकेडिंग पर है। उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने ट्वीट कर मामले को जोड़ा कि पाकिस्तानी महिला पत्रकार और कैप्टन की दोस्त अरूसा आलम के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ कथित संबंधों की जांच होनी चाहिए। जो नाम अब तक राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिबंधित था, अब कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद इस बारे में खुलकर बात कर रहे हैं। सोनिया गांधी और कई अन्य लोगों के साथ ट्विटर पर अपनी तस्वीरें पोस्ट कर वे जवाब दे रहे हैं कि वे किससे संबंधित हैं। अरुसा के अलावा सीमा सुरक्षा बल की जांच का दायरा बढ़ाने का भी मामला खड़ा हो गया है। हालांकि यह साफ हो गया है कि इससे पंजाब पुलिस की शक्तियां या अधिकार क्षेत्र कम नहीं होगा, बल्कि बेहतर तालमेल से दोनों बलों को तस्करी और घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी, लेकिन इस पर राजनीति भी हो रही है।

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