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जाने क्या है प्रोबा 3 मिशन

Proba-3 Mission

इस सितंबर में इसरो के पीएसएलवी द्वारा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी यानी ईएसए की प्रोबा 3 मिशन को लॉन्च किया जाएगा। इसमें दो छोटे उपग्रह कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान और एक स डिस्क के आकार का ऑकुल्टर अंतरिक्ष यान को एक साथ लॉन्च किया जाएगा। सूर्य की बाहरी वातावरण यानी कोरोना की विशेषताओं का बेहतर ढंग से पता लगाने के लिए इसे डिजाइन किया गया है। ईएसए के अनुसार लगभग 150 मीटर की दूरी पर उड़ान भरते हुए ऑकुल्टर सटीक रूप से कोरोनो ग्राफ के दूरबीन पर अपनी छाया डालेगा। जिससे सूर्य की सीधी रोशनी अवरुद्ध हो जाएगी। यह कोरोनो ग्राफ को एक समय में कई घंटों तक दृश्य पराबैगनी और ध्रुवीक प्रकाश में धुंधले सौर कोरोना की छवि बनाने की अनुमति देगा। यह अंतरिक्ष यान एक समय में 6 घंटे तक 144 मीटर या उससे अधिक की दूरी तक अपना गठन बनाए रखेंगे। प्रोबा 3 मिशन का लक्ष्य अंतरिक्ष में रणनीतियों मार्गदर्शन, नेविगेशन और नियंत्रण को मान्य करना है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान(पी.एस.एल.वी)

यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो द्वारा विकसित प्रक्षेपण प्रणाली है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए किया जाता है। इसका प्रक्षेपण पहली बार साल 1994 में हुआ था। यह इसरो द्वारा अब तक उपयोग किया जाने वाला सबसे विश्वसनीय रॉकेट है। इसका प्रबंधन श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जाता है। यह चार चरणों वाली प्रणाली है, जिसमें ठोस और तरल धन वाले रॉकेट चरणों का संयोजन शामिल है। पहला चरण ठोस धन वाला है जो सबसे नीचे स्थित है और छह स्ट्रैप ऑन ठोस रॉकेट बूस्टर से घिरा हुआ है। दूसरा चरण तरल इंधन वाला है। जबकि तीसरा चरण ठोस इंधन वाला है। चौथे चरण के दौरान कक्षा में स्थापित करने के लिए लॉन्चर एक तरल प्रणोदक का उपयोग करता है।

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