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भारतीय रेलवे को झटका; निजी ट्रेनों के टेंडर का पुनर्मूल्यांकन करेगा रेल मंत्रालय


प्राइवेट ट्रेनों के मामले में भारतीय रेलवे को बड़ा झटका। रेल मंत्रालय ने निजी ट्रेनों के लिए 30,000 करोड़ रुपये के टेंडर का पुनर्मूल्यांकन करने का फैसला किया है। दरअसल, निजी रेल टेंडर को निजी कंपनियों से अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला। यह टेंडर प्रक्रिया जुलाई 2020 में शुरू की गई थी। शुरुआत में 15 कंपनियों ने 12 क्लस्टर के लिए आवेदन किया था। हालांकि, वित्तीय बोली के लिए केवल दो बोलियां शेष रहीं।
कौन सी दो कंपनियां वित्तीय बोली से बच गईं?
निजी ट्रेनों के टेंडर वेलस्पन एंटरप्राइज लिमिटेड, मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड, गेटवे रेल फ्री लिमिटेड, क्यूब हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट। रेल मंत्रालय को फरवरी 2021 तक क्लस्टर उपलब्ध कराने की उम्मीद थी। प्रक्रिया में देरी हुई और जब जुलाई 2021 में वित्तीय बोलियां खुलीं, तो केवल दो कंपनियां, मेघा इंजीनियरिंग और आईआरसीटीसी रह गईं।
अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय अब निजी कंपनियों की कम हिस्सेदारी के कारण निविदा प्रक्रिया पर पुनर्विचार कर रही है। विचार-विमर्श के बाद नई निविदा आमंत्रित की जा सकती है। इस परियोजना से निजी कंपनियों द्वारा 30,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद थी। रेलवे का निर्माण देश में किया जाएगा और निजी कंपनियों को रेलवे के वित्तपोषण, खरीद, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी। इन ट्रेनों में भारतीय रेलवे के ड्राइवर और गार्ड होने थे। निजी कंपनी को तय हलाल शुल्क, ऊर्जा शुल्क और बोली के माध्यम से रेलवे को सकल राजस्व का एक हिस्सा देना था।

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