सीए सीएस भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के दायरे में
हाली में वित्त मंत्रालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम, यानि पीएमएलएa में बदलाव को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसके तहत मनी लॉन्ड्रिंग कानून का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके मुताबिक बैंक घोटालों, फर्जी कंपनियों व् जालसाज कारोबारियों का साथ देने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट यानि सीए कंपनी सेक्रेटरी सी एस व कॉस्ट अकाउंटेंट भी पीएमएलए के दायरे में आएंगे।
इस कदम का मकसद ग्राहकों को धनशोधन में मदद करने वाली कपटपूर्ण प्रथाओं पर अंकुश लगाना है। पीएमएलए की धारा 2 की उपधारा एक के अंतर्गत नए बदलाव किए गए हैं, जो कानून के अंतर्गत आने वाले व्यक्ति की विभिन्न श्रेणी को परिभाषित करता है। नए नियम के तहत सीए सीएस और इस तरह के लेनदेन करने वाले लागत और कार्य लेखाकार को अपने ग्राहकों की ओर से अब काम शुरू करने से पहले नो योर कंपनी, यानी केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
पीएमएलए के तहत गतिविधियों में शामिल होंगी। यदि पेशेवर अपने ग्राहक की ओर से किसी अचल संपत्ति खरीद और बिक्री जैसे वित्तीय लेनदेन करते हैं। ग्राहक से पैसे प्रतिभूतियों या अन्य संपत्तियों का प्रबंधन, बैंक बचत या प्रतिभूति खातों का प्रबंधन कंपनियों के निर्माण संचालित या प्रबंधन के लिए योगदान का संगठन कंपनियों के निर्माण संचालन के प्रबंधन सीमित देता। भागीदारियां ट्रस्ट और व्यापारिक संस्थाओं की खरीद और बिक्री, अधिनियम ये भी निर्धारित करता है कि यदि किसी ग्राहक द्वारा लेनदेन संदिग्ध प्रतीत होता है या अपराध की आय में शामिल है तो रिपोर्टिंग इकाई, भविष्य के व्यापारिक संबंधों की निगरानी करेगी।
गौरतलब है कि धनशोधन या मनी लॉन्डरिंग से तात्पर्य वैसे धन के रूपांतरण से है जो गैर कानूनी स्रोतों और विधियों द्वारा अवैध रूप से प्राप्त किया गया है। धनशोधन के अपराध से निपटने के लिए मनी लांड्रिंग निरोधक अधिनियम 2002 यानी पीएमएलए लाया गया। इसके तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराधों की जांच करना, संपत्ति की कुर्की जब्ती की कार्रवाई करना और संबंधित अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाना शामिल है।
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