Revenue Village Status: ओडिशा के अड़तीस गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया गया
ओडिशा के अड़तीस गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया गया है। ओडिशा के तटीय गंजम जिले में अड़तीस गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दे दिया गया है। ये गांव ऐसे थे जिनका अभी तक सर्वेक्षण नहीं किया गया था। गौरतलब है कि जिला मजिस्ट्रेट द्वारा हाल ही में इसके लिए एक अधिसूचना भी जारी की गई थी, जिसके बाद अब यह निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन के एक बयान के अनुसार 38 गांव को आधे दशक के बाद अपना नया दर्जा मिला है। ऐसा करने की प्रक्रिया 2017 में शुरू हुई थी और ये दर्जा उड़ीसा सर्वेक्षण और निपटान अधिनियम 1958 की धारा दो के क्लॉस 14 और अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी अधिनियम 2006 की धारा तीन के क्लास एक और एच के तहत राजस्व गांव का दर्जा दिया गया है। इन अड़तीस गांव के अलावा तीन जिलों जैसे ढेंकनाल, अंगुल और देवगढ़ के 14 अन्य वनगांव को पहले ही राजस्व गांव में बदल दिया गया है। गांव की स्थिति में बदलाव के साथ ही सामुदायिक वन अधिकारों को भी मंजूरी दी गई है और आवश्यक दस्तावेज संबंधित ग्रामसभाओं को सौंपे गए हैं। इन गांव के आदिवासी निवासी अब भूमि पर सभी अधिकारों का लाभ उठाने में सक्षम होंगे। जैसे की जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाना और जमीन खरीदने और बेचने का अधिकार भी होगा। इन गांवों में अब सरकारी संस्थान भी स्थापित किए जा सकते हैं और अब निवेशक ब्रिटिश शासन के तहत 1865 में अधिकृत वन अधिनियम 1878 के तहत भारत के जंगलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था। ये तीन श्रेणियाँ निम्न प्रकार से है जैसे आरक्षित वन, संरक्षित वन और ग्रामीण वन। नए प्रावधनों के तहत ग्रामीणों को आरक्षित वनों में रहने की अनुमति दी गई है, बशर्ते की वे वन विभाग को पेड़ों को काटने, जंगल को आग से बचाने के लिए मुफ्त श्रम प्रदान करें। ऐसे वनों को वन ग्राम कहा जाने लगा है।
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