Header Ads

Referendum in Uzbekistan: उज्बेकिस्तान में जनमत संग्रह

Referendum in Uzbekistan

मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान में हाल ही में नए संविधान पर जनमत संग्रह कराया गया है। जनमत संग्रह उज्बेकिस्तान में मानव अधिकारों और नागरिको की स्वतंत्रता को केंद्र में रखकर बनाए जा रहे नए संविधान पर कराया गया है। वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद नए बने देश और वे किस्तान में अब तक का ये तीसरा जनमत संग्रह है। हाल ही में सरकार द्वारा जनमत संग्रह के माध्यम से नागरिक को से अधिक स्वतंत्रता, बेहतर सामाजिक सुरक्षा और लैंगिक समानता जैसे विषयों के साथ संविधान को फिर से लिखने पर उनका मत मांगा गया था। उज्बेकिस्तान का नया संविधान उज्बेकिस्तान को एक संप्रभु लोकतांत्रिक कानून के शासन वाले सामाजिक और धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में परिभाषित करता है। उज्बेकिस्तान में यदि नया संविधान अपनाया जाता है तो राष्ट्रपति के 7 साल के कार्यकाल को दो लगातार कार्यकाल सीमा तक बढ़ाया जा सकेगा। उज्बेकिस्तान के कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति मिर्जी यो येव जिनका वर्तमान कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है। दो और कार्यालयों के लिए राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकते हैं, जो उन्हें वर्ष 2040 तक सत्ता में बनाए रख सकता है। आपको बता दें, जनमत संग्रह एक प्रत्यक्ष मतदान है जिसमें सरकार द्वारा लोगों से किसी विशेष प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए कहा जाता है। जनमत संग्रह नया संविधान बनाने, संविधान में संशोधन करके नया कानून या कोई विशेष सरकारी नीती बनाने पर कराया जा सकता है। भारत के संविधान में जनमत संग्रह के लिए या इसके खिलाफ़ कोई विशेष प्रावधान नहीं है, जिसे अंग्रेजी में प्लेबिसाइट कहा जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं

job

💼 नवीनतम जॉब पोस्ट

Current Affairs

📰 करंट अफेयर्स से जुड़ी ताज़ा पोस्ट


Blogger द्वारा संचालित.