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सोमवार, 1 मई 2023

Yellow Fever: येलो फीवर का खतरा हाल ही में सूडान से आने वाले भारतीय मूल के 117 यात्रियों को किया गया क्वारंटाइन

Yellow Fever

हाल ही में सूडान से आने वाले भारतीय मूल के 117 यात्रियों को क्वारंटाइन किया गया है क्योंकि उन्हें पीत ज्वर यानी येलो फीवर का टिकट नहीं लगाया गया है। इन यात्रियों में अगर बिमारी का कोई लक्षण नहीं उभरा तो सात दिनों बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा। आप बात करिए पीत ज्वर या येलो फीवर की, तो येलो फीवर वायरस द्वारा उत्पन्न होने वाला एक तीव्र हेमरेजिक रोग है, जो मनुष्य में संक्रमित मच्छर के काटने से होता है। एडिस प्रजाति के संक्रमित मच्छर वायरस को फैलातें है। ये पी लिया यानी जॉन्डिस के समान होती है। इसलिए इसे पीत ज्वर के नाम से जाना जाता है जो कुछ रोगियों को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं बुखार, सिर दर्द, पीलिया के लक्षण, मांसपेशियों में दर्द, मतली, उल्टी, थकान, लिवर और किडनी से संबंधित कार्य प्रणाली का ठप पड़ना आदि। येलो फीवर को विशेषकर प्रारंभिक अवस्था में डाइअग्नोस करना मुश्किल होता है। वाइरस अफ्रीका और मध्य और दक्षिण अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्थानिक है। टीकाकरण इसे रोकने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के अनुसार इस एक अत्यंत प्रभावी टीके की सिर्फ एक खुराक से रोका जा सकता है। ये सुरक्षित और किफायती होने के साथ साथ इस बिमारी के खिलाफ़ निरंतर प्रतिरक्षा एवं जीवन भर सुरक्षा प्रदान करने हेतु पर्याप्त है।

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