First trial of Star Berry Sense: स्टार बेरी सेन्स का पहला परीक्षण
हाल ही में इसरो ने एक नया लोगो को स्टार्स ऐन्सर का पहला परीक्षण लॉन्च सफलता पूर्वक आयोजित किया। अपने पहले परीक्षण में इसने ठीक से काम करना शुरू कर दिया है। ये इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ऐस्ट्रोफिज़िक्स यानी आईआईए के खगोलविदों द्वारा ऑफ द शेल्फ घटकों से विकसित एक नया कम लागत वाला स्टार्स ऐन्सर है। इस को स्टार बेरी सेन्स नाम दिया गया है। इसे पीएसएलवी सी 55 पर लॉन्च किया गया था, जिसका प्राथमिक उद्देश्य अंतरिक्ष में इसकी उत्तर जीवित है और निष्पादन का आकलन करना था। साथ ही, स्पेल आउट का मुख्य कार्य जल्दी और सटीक रूप से गणना करना है कि उपग्रह कहा इंगित कर रहा है, क्योंकि किसी भी अंतरिक्ष मिशन के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि किसी भी समय उपग्रह को कहा इंगित किया जा रहा है। अपने पहले अंतरिक्ष परीक्षण में पीएसएलवी और बीटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल यानी पीओईएम पर स्थापित सेंसर अच्छा निष्पादन कर रहा है। पीओईएम इसरो की एक अनोखी पहल है जो वैज्ञानिक प्रयोग को करने के लिए पीएसएलवी के चौथे चरण का उपयोग एक ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म के रूप में करता है। ये अंतरिक्ष में अल्पावधि के वैज्ञानिक प्रयोग करने का एक उत्कृष्ट अवसर है। इसका प्रारंभिक डेटा दर्शाता है कि यह इंगित दिशा यानी पॉन्टिंग डायरेक्शन की गणना करने में सक्षम है। स्पेल आउट का निर्माण विख्यात मिनी कंप्यूटर स्पीच बेरी पी के इर्द गिर्द किया गया है और इलेक्ट्रॉनिक्स व सॉफ्टवेयर को इन हाउस डिजाइन किया गया था। इसपे लूट का लाभ ये है की ये किफायती और निर्माण में सरल है तथा विभिन्न प्रकार के उपग्रहों पर इसे तैनात किया जा सकता है।
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